नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां दुर्गा का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है. आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा विधि से लेकर आरती तक पूरी जानकारी.
वैदिक पंचांग के अनुसार, मां चंद्रघंटा की पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से लेकर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.
मां चंद्रघंटा की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. फिर मां चंद्रघंटा का ध्यान और स्मरण करें. माता चंद्रघंटा की मूर्ति को लाल या पीले कपड़े पर रखें. मां को कुमकुम और अक्षत का लगाएं. विधिपूर्वक मां की पूजा करें.
माना जाता है कि मां चंद्रघंटा को खीर बहुत पसंद है इसलिए मां को केसर या साबूदाने की खीर का भोग लगा सकते हैं. पंचामृत का मिश्रण इन सभी पांच गुणों का प्रतीक है. पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का मिश्रण होता है. यह मां चंद्रघंटा को अत्यंत प्रिय है.
पिण्डजप्रवरारूढ़ा ण्डकोपास्त्रकेर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥ या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:।।
मीठे बोल सिखाने वाली।। मन की मालक मन भाती हो। चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।। सुंदर भाव को लाने वाली। हर संकट मे बचाने वाली।।
मीठे बोल सिखाने वाली।। मन की मालक मन भाती हो। चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।। सुंदर भाव को लाने वाली। हर संकट मे बचाने वाली।।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये। श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय।। मूर्ति चंद्र आकार बनाएं। सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।। शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।। कांची पुर स्थान तुम्हारा। करनाटिका में मान तुम्हारा।। नाम तेरा रटू महारानी। भक्त की रक्षा करो भवानी।।