आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन मां लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं। इस कारण से शरद पूर्णिमा को माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए विशेष दिन माना जाता है।
आश्विन मास की पूर्णिमा शरद पूर्णिमा कहलाती है। इस दिन मां लक्ष्मी का प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान और पूजाएं की जाती हैं।
इस दिन व्रत, पूजा और रात भर जागरण का विशेष महत्व है क्योंकि मान्यता है कि शरद ऋतु के आगमन पर देवी लक्ष्मी बदलाव का आनंद लेने के लिए पृथ्वी पर आती है। पौराणिक मान्यता है कि देवी लक्ष्मी को यह मौसम बहुत ही प्रिय है।
शरद पूर्णिमा पर रात्रि के समय देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने के साथ दीप भी जलाए जाते हैं। रात्रि में दीपक जलाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। रात्रि में आपको दरवाजे पर देसी घी का दीपक जरूर जलाना चाहिए।
आप प्रात जल्दी उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें तुलसी की पत्तियां डालकर कुछ देर छोड़ दें। अब इस पानी को घर के सभी कोनों में और मुख्य द्वार पर छिड़कें।